घुटने के दर्द के लिए कौन सा योग करना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Thu 8th Dec 2022 : 09:36

मसलन, घुटनों में दर्द की समस्या को ही ​ले लीजिए। कुछ सालों पहले तक हमने अपने बुजुर्गों को बुढ़ापे तक बिना लाठी का सहारा लिए चलते देखा है। लेकिन मॉडर्न शहरी लाइफस्टाइल जीने वाले लोग कम उम्र में ही गठिया, रुमेटाइड आर्थराइटिस, घुटने में दर्द या मूवमेंट की समस्या से परेशान होने लगते हैं।

1. बद्ध कोणासन (Baddha Konasana / Cobbler Pose)
बद्ध कोणासन बहुत ही आसान योगासन है। इसे किसी भी आयु का इंसान आसानी से कर सकता है। ये भीतरी जांघों और ग्रोइन को अच्छा खिंचाव देता है। ये हिप्स, पैरों, टखनों और घुटनों को अच्छी स्ट्रेचिंग देता है।

ये आसन हमारी मिड बॉडी में ब्लॉकेज को खत्म करता है और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ा देता है। इसके अभ्यास से हिप्स को दोनों साइड से अच्छी मसाज मिलती है। इस आसन के नियमित अभ्यास से घुटनों में दर्द की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

बद्ध कोणासन करने की विधि :

कमर सीधी करके योग मैट पर बैठ जाएं।
अपनी टांगों को खोलकर बाहर की तरफ फैलाएं।
सांस बाहर की ओर छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ें।
दोनों एड़ियों को अपने पेट के नीचे की तरफ ले आएं।
दोनों एड़ियां एक-दूसरे को छूती रहेंगी।
इसके बाद घुटनों को दोनों तरफ नीचे की ओर ले जाएं।
दोनों एड़ियों को जितना हो सके पेट के नीचे और करीब ले आएं।
अंगूठे और पहली अंगुली की मदद से पैर के बड़े अंगूठे को पकड़ लें।
ये पक्का करें कि पैर का बाहरी किनारा हमेशा फर्श को छूता रहे।
मुद्रा में सहज हों तो जांचें कि प्यूबिस और टेलबोन फर्श से समान दूरी पर हैं।
पेल्विस को सामान्य स्थिति में होना चाहिए।
पेरिनम फर्श के समानांतर बना रहे।
रीढ़ की हड्डी सीधी रहे और कंधे पीछे की तरफ खिंचे रहें।
इस दौरान सैक्रम या पीठ के पीछे की तिकोनी हड्डी भी मजबूत बनी रहे।
कभी भी घुटनों पर जमीन को छूने के लिए दबाव न डालें।
आप जांघ की हड्डियों पर घुटनों को नीचे करने के लिए हल्का दबाव दे सकते हैं।
इससे घुटने अपने आप जमीन की तरफ चले जाएंगे।
इस मुद्रा में 1 से 5 मिनट तक बने रहें।
सांस खींचते हुए घुटनों को वापस सीने की तरफ लेकर आएं।
पैरों को धीरे-धीरे सीधा करें। अब विश्राम करें।

2. उत्थित हस्त पादांगुष्ठासन (Utthita Hasta Padangusthasana / Extended Hand To Big Toe Pose)
उत्थित हस्त पादांगुष्ठासन को करने से हाथों, पैरों, टखनों और घुटनों में खिंचाव आता है, जो उन्हें मजबूत बनाने में बहुत सहायक होता है। इस आसन को करते समय जिस पैर पर आप खड़े होते है, उसे खासतौर पर मजबूत बनाता है। ये शारीरिक संतुलन को बनाये रखने में सहायक होता है।

उत्थित हस्त पादांगुष्ठासन करने की विधि :

योग मैट पर ताड़ासन की स्थिति में खड़े हो जाएं।
सांस को अंदर लें।
दाएं पैर को ऊपर उठाकर घुटने को पेट के पास ले कर आयें।
इस स्थिति में दाएं कूल्हे पर खिंचाव महसूस होगा।
संतुलन बनाये रखने के लिए अपना ध्यान बाएं पैर पर रखिये।
इसके बाद बायां हाथ कमर पर रखें।
दाएं हाथ से दाएं पैर का अंगूठा पकड़ लें।
दाएं पैर को आगे की तरफ बढ़ाएं।
प्रयास करें कि आपका पूरा पैर सीधा हो जाए।
साथ ही जितना ऊपर हो सके, उतना ऊपर कर लें।
इसे अपनी क्षमता के अनुसार ही करें।
इसके बाद सांस छोड़ते हुए सिर को घुटने से छुएं।
कम से कम 5 बार सांस को अंदर लें और बाहर की तरफ छोड़ें।
सांस को अंदर लेते हुए अपने सिर को ऊपर उठायें।
सिर को घुटने से छूने में कठिनाई हो तो सिर को जमीन की ओर झुका कर रखें
दृष्टि को सामने की तरफ रखते हुए सांस को छोड़ें।
दाएं पैर को बाहर की ओर घुमायें। संभव हो सके तो 90 डिग्री तक घुमाएं।
इस मुद्रा में आने पर सिर को बाईं ओर घुमाएं।
तब तक करना है जब तक आपकी दृष्टि बाएं कंधे पर ना आ जाए।
पांच बार सांस अंदर लें और बाहर को छोड़ें।
इस आसन में 30 से 60 सेकंड तक रुकें।
अब 5 बार सांस लेने के बाद इस मुद्रा से बाहर आ सकते हैं।
समय सांस अंदर लेते हुए सिर को वापस सामने की ओर ले जाएं।
दाएं पैर को भी सामने की ओर लाएं।
फिर से एक बार सिर को घुटने पर टिकाएं और वापस ऊपर की तरफ ले आएं।
इस समय पांच बार सांस नहीं लेनी है।
अब दाएं हाथ को भी कमर पर रख लें, लेकिन दाएं पैर को ऊपर ही रखें।
इस स्थिति में भी पांच बार सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें।
आसन को समाप्त करने के लिए अपने दाएं पैर को नीचे कर लें।
अब ताड़ासन की मुद्रा को समाप्त कर दें।
अब यही प्रक्रिया बाईं ओर भी दोहराएं।

3. मालासन (Malasana / Squat Or Garland Pose)
मालासन को घुटनों के लिए बेहतरीन योगासन माना जाता है। ये लोअर बैक के लिए अच्छा काम करता है और पीठ की मांसपेशियों को लचीला बनाता है। ये कमर और स्पाइन के मूवमेंट को भी बेहतर बनाता है।

मालासन का नियमित रूप से अभ्यास करने पर घुटने की मांसपेशियों में मजबूती आने लगती है। ये इनर थाइज, क्वाड्रिसेप्स, हैमस्टिंग, काव्स को टोन करता है। ये टांगों में रक्त संचार को भी सुधारता है। साइटिका और वेरिकोज वेन की समस्या होने पर मालासन बहुत कारगर होता है।

मालासन करने की विधि :

योग मैट पर ताड़ासन में खड़े हो जाएं।
रीढ़ को खींचते हुए पेट को भीतर की ओर खींचें।
कंधों को ऊपर की तरफ खींचते हुए कुछ गहरी सांसें लें और छोड़ें।
दोनों हाथों को नमस्ते या प्रणामासन की मुद्रा में लेकर आएं।
सीने को फुलाएं और सख्त बनाए रखें।
गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें।
सांस छोड़ते हुए घुटनों के बल नीचे बैठ जाएं।
टांगें साथ रहेंगी लेकिन घुटनों के बीच अंतर रहना चाहिए।
जांघों को धीरे-धीरे फैलाएं।
जांघों को शरीर की चौड़ाई से थोड़ा बाहर ले जाने का प्रयास करें।
सांस छोड़ते हुए आगे झुकें जिससे धड़ जांघों के बीच में फिट हो जाए।
दोनों कु​हनियां इनर थाइज पर टिका दें।
अब धड़ आराम से बाहर निकाल सकेगा।
भीतरी जांघों को धड़ के बगल से दबाएं।
बाहों को फैलाकर घुमाएं कि पिंडली बगल में फिट हो जाए।
अब अपनी एड़ियों को पकड़ें।
इस पोज को कुछ सेकेंड तक रोककर रखें।
सांस ​भीतर खींचते हुए आसन को विराम दें।

4. वीरासन (Virasana / Hero Pose)

वीरासन के फायदे बेमिसाल हैं। इससे टांगों को अच्छा स्ट्रेच मिलता है, ये आपको रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कामों जैसे दौड़ना, वॉकिंग और साइकिलिंग में मदद मिलती है। ये आपके टांगों को भीतर से मजबूत बनाता है।

आपके क्वाड्रीसेप्स की लंबाई बढ़ती है और सैक्रम / Sacrum (कमर के पीछे की तिकोनी हड्डी) चौड़ी होती है। कई बार कुर्सी पर बैठने वाले लोगों को ये हड्डी सिकुड़ने की शिकायत आती है। ये आसन कब्ज और कमजोर पाचन की समस्या से निपटने में भी मदद मिलती है।

वीरासन को मेडिटेशन के लिए भी बेस्ट आसन माना जाता है। इस आसन को करने के दौरान आप दुनिया से जुड़े रहते हुए भी दूर हो जाते हैं। आपका सोता हुआ अवचेतन मन जाग्रत हो जाता है। ये आसन किसी मजबूत शरीर और स्थिर मन वाले योद्धा के लिए ही बनाया गया था।

वीरासन करने की विधि :

योग मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं।
घुटने हिप्स के ठीक नीचे होंं। हाथों को आराम से घुटनों पर रखें।
घुटनों को पास लाएं जिससे पैरों के बीच का अंतर अपने आप बढ़ जाएगा।
ये अंतर हिप्स की चौड़ाई से ज्यादा होना चाहिए।
मजबूती से पैरों के टॉप्स को फर्श की तरफ दबाएं।
धीरे-धीरे अपने हिप्स को नीचे की तरफ लाएं।
पिंडलियों को मोड़ते हुए दूर करें। हिप्स एड़ियों के ठीक बीच में रहें।
पैरों की अंगुलियों को बाहर की तरफ निकलने दें।
टखने ऐसी स्थिति में होने चाहिए, जैसे वो घुटनों को बचा रहे हों।
नाभि को भीतर की तरफ खींचें।
रीढ़ की हड्डी को खींचते हुए सिर को पीछे की तरफ झुकाने की कोशिश करें।
वीरासन का अभ्यास 30 सेकेंड तक करें। इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं।
दक्ष होने के बाद ही आसन का अभ्यास मेडिटेशन के लिए करें।

5. क्रोंचासन (Krounchasana / Heron Pose)
क्रोंचासन, योग विज्ञान में मध्यम कठिनाई वाला आसन है। इसे अष्टांग योग की शैली का आसन माना जाता है। क्रोंचासन का अभ्यास 30 सेकेंड से लेकर 1 मिनट तक किया जाना चाहिए। इस आसन को करने से लोगों के जोड़ लचीले होने लगते हैं और जिन लोगों के पैर फ्लैट होते हैं उन्हें भी काफी राहत मिलती है।

क्रोंचासन करने की विधि :

योग मैट पर बैठकर पैरों को सामने की ओर फैला लें।
दाहिने पैर को मोड़कर पीछे की तरफ ले जाएं और कूल्हे के नीचे दबा लें।
शरीर को संतुलित करने की कोशिश करें।
दोनों हाथों से बाएं पैर के तलवे को पकड़कर ऊपर उठाएं।
गर्दन और पीठ को सीधा बनाए रखें।
पैर को उठाते हुए गर्दन की सीध में लाने का प्रयास करें।
गहरी सांस खींचते रहें और इसी स्थिति में 30 सेकेंड तक बने रहें।
सांस छोड़ते हुए पैर को नीचे की तरफ लेकर आएं।
इसी स्थिति को दूसरे पैर के साथ भी करें।

6. पद्मासन (Padmasana / Lotus Pose)
पद्मासन के अभ्यास से पैरों में लचीलापन बढ़ता है। ये जांघों, टखनों, घुटनों, तलवों और एड़ियों को बेहतरीन स्ट्रेच और मजबूती देता है। इस आसन के अभ्यास से शरीर न सिर्फ मजबूत बल्कि बेहद लचीला भी बनता है।

पद्मासन करने से शरीर के साथ ही मन को भी बहुत जबरदस्त फायदे मिलते हैं। अगर कभी अशांत और बेचैन महसूस कर रहे हों तो पद्मासन का अभ्यास करें। ये मन को शांत करने में मदद करेगा। योगी इस आसन को अलौकिक ऊर्जा प्राप्त करने, मेडिटेशन या ध्यान करने, चक्र या कुंडलिनी को जाग्रत करने के लिए करते हैं।

पद्मासन करने की विधि :

योग मैट पर सीधे बैठ जाएं।
रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और टांगों को फैलाकर रखें।
धीरे से दाएं घुटने को मोड़कर बायीं जांघ पर रखें।
एड़ी पेट के निचले हिस्से को छूनी चाहिए।
ऐसा ही दूसरी पैर के साथ भी करते हुए पेट तक लेकर आएं।
दोनों पैरों के क्रॉस होने के बाद अपने हाथों को मनपसंद मुद्रा में रखें।
सिर और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
लंबी और गहरी सांसें लेते रहें।
सिर को धीरे से नीचे की तरफ ले जाएं।
ठोड़ी को गले से छूने की कोशिश करें।
इसी आसन को दूसरे पैर को ऊपर रखकर अभ्यास करें।

7. नटराजासन (Natarajasana / Lord of the Dance Pose)
नटराजासन मध्यम कठिनाई या इंटरमीडिएट लेवल का आसन है। इसे विन्यास योग की श्रेणी में रखा जाता है। इस आसन को करने की अवधि 15 से 30 सेकेंड की होती है। इसे एक-एक बार दोनों पैरों से करना चाहिए।

नटराजासन को करने के दौरान कंधों, जांघों, पेट के निचले हिस्से, पसलियों और लिंग के आसपास की मांसपेशियों पर खिंचाव आता है। जबकि नटराजासन के अभ्यास से टांगें, एड़ी और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।

नटराजासन करने की विधि :

योग मैट पर ताड़ासन में खड़े हो जाएं।
सांस भीतर लें, और बायां पैर पीछे की ओर उठाएं!
पैर को इतना उठाएं कि एड़ी बाएं हिप्स को टच करने लगे।
घुटना म़ुड़ा रहे। पूरे शरीर का वजन दाएं पैर पर रहेगा।
दायीं जांघ का दबाव हिप्स के जोड़ की तरफ डालें।
दाएं घुटने को ऊपर की तरफ खींचते हुए जोर डालें।
दायां पैर मजबूत और सीधा बना रहे।
धड़ को सीधा रखें। बाएं हाथ से बाएं पैर को पकड़ें।
निचली पीठ दबी हुई न रहे।
सुनिश्चित करें कि प्युबिस का हिस्सा नाभि की तरफ उठा हुआ है।
फर्श पर अपनी टेलबोन को दबाएं।
बाएं पैर को ऊपर उठाना शुरू करें।
फर्श से दूर और पीछे, अपने धड़ से दूर।
बाईं जांघ को पीछे बढ़ाएं और फर्श के समानांतर।
दाहिने हाथ को आगे बढ़ाएं, जैसे कि वह फर्श के समानांतर हो।
इस स्थिति में 15 से 30 सेकेंड तक बने रहें।
बाद में इसी आसन को दूसरे पैर से दोहराएं।

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